सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उमा राम सुभाउ जेहिं जाना। ताहि भजनु तजि भाव न आना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे उमा! जिसने श्रीरामजीका स्वभाव जान लिया, उसे भजन छोड़कर दूसरी बात ही नहीं सुहाती! यह स्वामी-सेवकका संवाद जिसके हृदयमें आ गया, वही श्रीरघुनाथजीके चरणोंकी भक्ति पा गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 744 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उमा राम सुभाउ जेहिं जाना। ताहि भजनु तजि भाव न आना।।
यह संवाद जासु उर आवा। रघुपति चरन भगति सोइ पावा।।
स्रोत अभिलेख 5.34 · पुस्तक पृ. 744, 745
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उमा राम सुभाउ जेहिं जाना। ताहि भजनु तजि भाव न आना।।
English explanation
O Uma, whoever has understood Rama’s nature finds nothing pleasing apart from devotion to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| राम | राम का | Rama’s |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| जेहिं | जिसने | whoever |
| जाना | जान लिया | has understood |
| ताहि | उसे | to that person |
| भजनु | राम का भजन | devotion to Rama |
| तजि | छोड़कर; के सिवा | apart from |
| भाव | भाता है | is pleasing |
| न | नहीं | not |
| आना | अन्य कुछ | anything else |
2 यह संवाद जासु उर आवा। रघुपति चरन भगति सोइ पावा।।
English explanation
Whoever takes this dialogue to heart attains devotion to Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| संवाद | संवाद | dialogue |
| जासु | जिसके | whose |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आवा | आया; उतर गया | entered; took root |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चरन | चरणों की | to the feet |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सोइ | उसी ने | that very person |
| पावा | प्राप्त की | attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 744
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 744, 745
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।