सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी।।
मूल पाठ
नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी।।
सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी। एवमस्तु तब कहेउ भवानी।।
स्रोत अभिलेख 5.34 · पुस्तक पृ. 744, 745
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! मुझे अत्यन्त सुख देनेवाली अपनी निश्चल भक्ति कृपा करके दीजिये। हनुमान्जीकी अत्यन्त सरल वाणी सुनकर, हे भवानी! तब प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने 'एवमस्तु (ऐसा ही हो) कहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 744 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी।।
English explanation
O Lord, graciously grant me devotion that brings great joy and never fades.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सुखदायनी | सुख देने वाली | giving joy |
| देहु | दीजिए | please grant |
| कृपा | कृपा | grace |
| करि | करके | having shown |
| अनपायनी | कभी न मिटने वाली | unfailing; imperishable |
2 सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी। एवमस्तु तब कहेउ भवानी।।
English explanation
O Bhavani, hearing Hanuman’s utterly sincere words, the Lord then said, ‘So be it.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| परम | अत्यंत | utterly |
| सरल | सरल और निष्कपट | sincere and guileless |
| कपि | हनुमान की | of Hanuman |
| बानी | वाणी | words |
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| तब | तब | then |
| कहेउ | कहा | said |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 744
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 744, 745
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।