सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन कहहिं कपिबृंदा। जय जय जय कृपाल सुखकंदा।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन कहहिं कपिबृंदा। जय जय जय कृपाल सुखकंदा।।
तब रघुपति कपिपतिहि बोलावा। कहा चलैं कर करहु बनावा।।
स्रोत अभिलेख 5.34 · पुस्तक पृ. 744, 745
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर वानरगण कहने लगे—कृपालु आनन्दकन्द श्रीरामजीकी जय हो, जय हो, जय हो! तब श्रीरघुनाथजीने कपिराज सुग्रीवको बुलाया और कहा—चलनेकी तैयारी करो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 744 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि प्रभु बचन कहहिं कपिबृंदा। जय जय जय कृपाल सुखकंदा।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, the bands of monkeys said, ‘Victory, victory, victory to you, compassionate source of joy!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| कपिबृंदा | वानरों के समूह | bands of monkeys |
| जय | जय हो | victory to you |
| जय | जय हो | victory to you |
| जय | जय हो | victory to you |
| कृपाल | हे कृपालु | O compassionate one |
| सुखकंदा | हे सुख के मूल स्रोत | O source of joy |
2 तब रघुपति कपिपतिहि बोलावा। कहा चलैं कर करहु बनावा।।
English explanation
Then Rama summoned Sugriva, king of the monkeys, and said, ‘Let us go; make preparations to depart.’ The independent meaning of ‘कर’ in the supplied text is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | राम ने | Rama |
| कपिपतिहि | वानरराज सुग्रीव को | Sugriva, king of the monkeys |
| बोलावा | बुलाया | summoned |
| कहा | कहा | said |
| चलैं | चलें | let us go |
| कर | का/की; यहाँ चलने की तैयारी से संबंधित संबंधसूचक शब्द। | Of or for; a relational marker in ‘preparations for departure.’ |
| करहु | करो | make |
| बनावा | तैयारी | preparations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 744
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 744, 745
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।