सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस सज्जन मम उर बस कैसें। लोभी हृदयँ बसइ धनु जैसें।।
मूल पाठ
अस सज्जन मम उर बस कैसें। लोभी हृदयँ बसइ धनु जैसें।।
तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें। धरउँ देह नहिं आन निहोरें।।
स्रोत अभिलेख 5.48 · पुस्तक पृ. 757, 758
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा सज्जन मेरे हृदयमें कैसे बसता है, जैसे लोभीके हृदयमें धन बसा करता है। तुम-सरीखे संत ही मुझे प्रिय हैं। मैं और किसीके निहोरेसे (कृतज्ञतावश) देह धारण नहीं करता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 758 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस सज्जन मम उर बस कैसें। लोभी हृदयँ बसइ धनु जैसें।।
English explanation
How does such a virtuous person dwell in my heart? As wealth dwells in a greedy person's heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| सज्जन | सदाचारी व्यक्ति | a virtuous person |
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बस | बसता है | dwells |
| कैसें | कैसे | how |
| लोभी | लोभी व्यक्ति के | of a greedy person |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बसइ | बसता है | dwells |
| धनु | धन | wealth |
| जैसें | जैसे | just as |
2 तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें। धरउँ देह नहिं आन निहोरें।।
English explanation
Saints like you are dear to me; for their sake I take bodily form, not at another's entreaty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| सारिखे | जैसे | like |
| संत | संत | saints |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोरें | मुझे | to me |
| धरउँ | मैं धारण करता हूँ | I assume |
| देह | शरीर | bodily form |
| नहिं | नहीं | not |
| आन | अन्य के | another's |
| निहोरें | आग्रह पर; विनती से | at the entreaty of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 758
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 757, 758
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।