सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब कै ममता ताग बटोरी। मम पद मनहि बाँध बरि डोरी।।
मूल पाठ
सब कै ममता ताग बटोरी। मम पद मनहि बाँध बरि डोरी।।
समदरसी इच्छा कछु नाहीं। हरष सोक भय नहिं मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.48 · पुस्तक पृ. 757, 758
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन सबके ममत्वरूपी तागोंको बटोरकर और उन सबकी एक डोरी बटकर उसके द्वारा जो अपने मनको मेरे चरणोंमें बाँध देता है (सारे सांसारिक सम्बन्धोंका केन्द्र मुझे बना लेता है), जो समदर्शी है, जिसे कुछ इच्छा नहीं है और जिसके मनमें हर्ष, शोक और भय नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 757 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब कै ममता ताग बटोरी। मम पद मनहि बाँध बरि डोरी।।
English explanation
one who gathers the threads of attachment to all these, twists them into a cord, and binds the mind to my feet,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | इन सब | all these |
| कै | की | of; toward |
| ममता | ममता; अपनापन | attachment; possessive affection |
| ताग | धागे | threads |
| बटोरी | बटोरकर | having gathered |
| मम | मेरे | my |
| पद | चरणों से | to the feet |
| मनहि | मन को | the mind |
| बाँध | बाँध देता है | binds |
| बरि | बटकर; ऐंठकर | having twisted together |
| डोरी | डोरी | cord |
2 समदरसी इच्छा कछु नाहीं। हरष सोक भय नहिं मन माहीं।।
English explanation
who sees all with an equal eye, has no desire, and has no elation, sorrow, or fear in the mind—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समदरसी | समान दृष्टि रखने वाला | one who sees impartially |
| इच्छा | कामना | desire |
| कछु | कोई भी | any |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| हरष | हर्ष | elation |
| सोक | शोक | sorrow |
| भय | डर | fear |
| नहिं | नहीं | not |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 757
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 757, 758
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