सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि बिहसि ताहि उर लाई। चलेउ सभाँ ममता अधिकाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणने ऐसा कहकर हँसकर उसे हृदयसे लगा लिया और ममता बढ़ाकर (अधिक स्नेह दर्शाकर) वह सभामें चला गया। मन्दोदरी हृदयमें चिन्ता करने लगी कि पतिपर विधाता प्रतिकूल हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 748 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि बिहसि ताहि उर लाई। चलेउ सभाँ ममता अधिकाई।।
मंदोदरी हृदयँ कर चिंता। भयउ कंत पर बिधि बिपरीता।।
स्रोत अभिलेख 5.37 · पुस्तक पृ. 748, 748
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि बिहसि ताहि उर लाई। चलेउ सभाँ ममता अधिकाई।।
English explanation
Saying this and laughing, he clasped Mandodari to his heart and went to the council, his attachment greatly heightened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| बिहसि | हँसकर | laughing |
| ताहि | उसे, मंदोदरी को | her, Mandodari |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाई | लगाकर | having clasped |
| चलेउ | चला गया | went |
| सभाँ | सभा में | to the council |
| ममता | मोह, आसक्ति | possessive attachment |
| अधिकाई | बहुत बढ़ी हुई | greatly heightened |
2 मंदोदरी हृदयँ कर चिंता। भयउ कंत पर बिधि बिपरीता।।
English explanation
Mandodari worried in her heart that Providence had turned against her husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी | Mandodari, Ravana’s wife |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| कर | करती है | does; feels |
| चिंता | चिंता | worry |
| भयउ | हो गया | has become |
| कंत | पति, रावण | her husband, Ravana |
| पर | के प्रति | toward |
| बिधि | विधाता, भाग्य का नियंता | Providence, the ordainer of fate |
| बिपरीता | प्रतिकूल | adverse |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 748
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 748
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।