सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं आवइ मर्कट कटकाई। जिअहिं बिचारे निसिचर खाई।।
मूल पाठ
जौं आवइ मर्कट कटकाई। जिअहिं बिचारे निसिचर खाई।।
कंपहिं लोकप जाकी त्रासा। तासु नारि सभीत बड़ि हासा।।
स्रोत अभिलेख 5.37 · पुस्तक पृ. 748, 748
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि वानरोंकी सेना आवेगी तो बेचारे राक्षस उसे खाकर अपना जीवननिर्वाह करेंगे। लोकपाल भी जिसके डरसे काँपते हैं, उसकी स्त्री डरती हो, यह बड़ी हँसीकी बात है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 748 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं आवइ मर्कट कटकाई। जिअहिं बिचारे निसिचर खाई।।
English explanation
If the monkey army comes, the poor demons will live by eating them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| आवइ | आए | comes |
| मर्कट | वानरों की | of monkeys |
| कटकाई | सेना | army |
| जिअहिं | जीवित रहेंगे | will live |
| बिचारे | बेचारे | poor fellows |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| खाई | खाकर | by eating them |
2 कंपहिं लोकप जाकी त्रासा। तासु नारि सभीत बड़ि हासा।।
English explanation
The guardians of the worlds tremble in fear of him, yet his wife is frightened—how laughable!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंपहिं | काँपते हैं | tremble |
| लोकप | लोकों के रक्षक देवता | divine guardians of the worlds |
| जाकी | जिसके | whose |
| त्रासा | भय से | from fear |
| तासु | उसकी | his |
| नारि | पत्नी | wife |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| बड़ि | बड़ी | greatly |
| हासा | हँसी की बात | laughable matter |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 748
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 748
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