सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि करत दंडवत देखा। तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा।।
मूल पाठ
अस कहि करत दंडवत देखा। तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा।।
दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा। भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा।।
स्रोत अभिलेख 5.46 · पुस्तक पृ. 755, 756
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुने उन्हें ऐसा कहकर दण्डवत् करते देखा तो वे अत्यन्त हॢषत होकर तुरंत उठे। विभीषणजीके दीन वचन सुननेपर प्रभुके मनको बहुत ही भाये। उन्होंने अपनी विशाल भुजाओंसे पकड़कर उनको हृदयसे लगा लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 755 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि करत दंडवत देखा। तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा।।
English explanation
Seeing Vibhishana prostrate himself after saying this, Lord Rama immediately rose in great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| करत | करते हुए | performing |
| दंडवत | भूमि पर पूरे शरीर से प्रणाम | full-body prostration |
| देखा | देखा | saw |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| उठे | उठ खड़े हुए | rose |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| हरष | हर्ष | joy |
| बिसेषा | अत्यधिक | very great |
2 दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा। भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा।।
English explanation
Vibhishana’s humble words pleased the Lord. Taking hold of him with his mighty arms, Rama embraced him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन | विनम्र, दीनतापूर्ण | humble |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मन | मन को | to the heart |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
| भुज | भुजाओं से | with his arms |
| बिसाल | विशाल | mighty |
| गहि | पकड़कर | taking hold |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| लगावा | लगा लिया | held close |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 755
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 756
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।