लङ्काकाण्ड · दोहा 107 · दोहा
सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत।
सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत।
सानुकूल कोसलपति रहहुँ समेत अनंत॥ १०७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.107 · पुस्तक पृ. 884, 885
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत।
हे पुत्र हनुमान, सुनो! सभी सद्गुण तुम्हारे हृदय में बसें।
English explanation
Listen, my son Hanuman! May all good qualities dwell in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| सदगुन | अच्छे गुण | good qualities |
| सकल | सभी | all |
| तव | तुम्हारे | your |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बसहुँ | बसें | may dwell |
| हनुमंत | हे हनुमान | O Hanuman |
2सानुकूल कोसलपति रहहुँ समेत अनंत॥ १०७॥
कोसलपति राम, अनंतस्वरूप लक्ष्मण सहित, तुम पर कृपालु बने रहें।
English explanation
May Rama, lord of Kosala, together with Lakshmana, the embodiment of Ananta, remain gracious toward you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुकूल | तुम्हारे प्रति अनुकूल और कृपालु | favorably disposed and gracious toward you |
| कोसलपति | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
| रहहुँ | बने रहें | may remain |
| समेत | सहित | together with |
| अनंत | अनंत शेष के स्वरूप लक्ष्मण | Lakshmana, the embodiment of Ananta-Shesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 107
- स्रोत अभिलेख
- 6.107
- सहायक विषय
- विभीषणका राज्याभिषेक
- मुद्रित पृष्ठ
- 884, 885
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