लङ्काकाण्ड · दोहा 108 · दोहा
तेहि कारन करुनानिधि कहे कछुक दुर्बाद।
तेहि कारन करुनानिधि कहे कछुक दुर्बाद।
सुनत जातुधानीं सब लागीं करै बिषाद॥ १०८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.108 · पुस्तक पृ. 885, 886
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तेहि कारन करुनानिधि कहे कछुक दुर्बाद।
उस कारण करुणा के भंडार श्रीराम ने कुछ कठोर वचन कहे।
English explanation
For that reason, Rama, the treasure of compassion, spoke a few harsh words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| कारन | कारण से | for the reason |
| करुनानिधि | करुणा के भंडार श्रीराम | Rama, the treasure of compassion |
| कहे | कहे | spoke |
| कछुक | कुछ | a few |
| दुर्बाद | कठोर वचन | harsh words |
2सुनत जातुधानीं सब लागीं करै बिषाद॥ १०८॥
सुनते ही सभी राक्षसियाँ दुःख करने लगीं।
English explanation
On hearing this, all the demonesses began to grieve.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing this |
| जातुधानीं | राक्षसियाँ | the demonesses |
| सब | सभी | all |
| लागीं | लगीं | began |
| करै | करने | to express |
| बिषाद | दुःख | grief |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 108
- स्रोत अभिलेख
- 6.108
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 885, 886
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