लङ्काकाण्ड · दोहा 109 (क) · दोहा
बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान।
बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान।
गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान॥ १०९ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान।
देवता हर्षित होकर फूल बरसाते हैं और आकाश में नगाड़े बजते हैं।
English explanation
The gods joyfully shower flowers, and kettledrums resound in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| सुर | देवता | the gods |
| बाजहिं | बजते हैं | resound |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
2गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान॥ १०९ (क)॥
किन्नर गाते हैं और विमानों पर चढ़ी देवांगनाएँ नाचती हैं।
English explanation
Celestial musicians sing, and the gods' consorts dance aboard celestial vehicles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| किंनर | किन्नर, दिव्य गायक | celestial musicians |
| सुरबधू | देवताओं की पत्नियाँ | the gods' consorts |
| नाचहिं | नाचती हैं | dance |
| चढ़ीं | चढ़ी हुई | having boarded |
| बिमान | दिव्य विमानों पर | celestial vehicles |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 109 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
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