लङ्काकाण्ड · दोहा 109 (ख) · दोहा
जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार।
जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार।
देखि भालु कपि हरषे जय रघुपति सुख सार॥ १०९ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार।
जनकपुत्री सीता सहित प्रभु राम की शोभा असीम और अपार है।
English explanation
The splendor of Lord Rama together with Sita, Janaka's daughter, is immeasurable and boundless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, Janaka's daughter |
| समेत | सहित | together with |
| प्रभु | प्रभु राम की | Lord Rama's |
| सोभा | शोभा | splendor |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| अपार | सीमारहित | boundless |
2देखि भालु कपि हरषे जय रघुपति सुख सार॥ १०९ (ख)॥
यह देखकर भालू और वानर हर्षित हुए: सुख के सारस्वरूप रघुपति राम की जय हो!
English explanation
Seeing this, the bears and monkeys rejoiced: Glory to Rama, Lord of Raghu's line, the very essence of happiness!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| जय | जय हो | glory to |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, Lord of Raghu's line |
| सुख | सुख का | of happiness |
| सार | सारस्वरूप | the very essence |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 109 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
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