लङ्काकाण्ड · दोहा 56 · दोहा/सोरठा
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।
राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.56 · पुस्तक पृ. 825, 826
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।
यह सुनकर दसकंठ रावण बहुत क्रोधित हुआ; तब कालनेमि ने मन में विचार किया।
English explanation
Hearing this, ten-necked Ravana became very angry; Kalanemi then reflected inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| दसकंठ | दस कंठ वाला रावण | ten-necked Ravana |
| रिसान | क्रोधित हुआ | became angry |
| अति | बहुत | very |
| तेहिं | उसने, अर्थात कालनेमि ने | he, namely Kalanemi |
| मन | मन में | in his mind |
| कीन्ह | किया | made |
| बिचार | विचार | a reflection |
2 राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।
राम के दूत के हाथों मरना ही बेहतर है, बजाय इस दुष्ट के हाथों, जो मलिनता में रत और उसका ढेर है। अंतिम वर्णन में दिए गए ‘रत’ का संबंध कुछ अनिश्चित है।
English explanation
Better that I die at the hands of Rama’s messenger than at the hands of this wicked one, immersed in impurity and a heap of it. The construction involving the supplied ‘रत’ is somewhat uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| दूत | दूत, हनुमान | messenger, Hanuman |
| कर | हाथों | at the hands of |
| मरौं | मैं मरूँ | may I die |
| बरु | बल्कि; बेहतर है | rather; it is better |
| यह | यह, अर्थात रावण | this one, namely Ravana |
| खल | दुष्ट | wicked one |
| रत | रत; लिप्त | engrossed; immersed |
| मल | मलिनता; पापरूपी मैल | impurity; sinful filth |
| भार | ढेर; बोझ | heap; burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 56
- स्रोत अभिलेख
- 6.56
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 826
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।