लङ्काकाण्ड · दोहा 55 · दोहा/सोरठा
राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।
राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।
कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.55 · पुस्तक पृ. 825, 825
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।
सुषेण ने आकर राम के चरणकमलों में सिर झुकाया।
English explanation
Sushena came and bowed his head at Rama's lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | Rama's |
| पदारबिंद | कमल-समान चरणों में | at the lotus feet |
| सिर | सिर | head |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| आइ | आकर | having come |
| सुषेन | वैद्य सुषेण | Sushena, the physician |
2 कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।
उन्होंने पर्वत और औषधि के नाम बताए और कहा, ‘हे पवनपुत्र, उसे लाने जाओ।’
English explanation
He named the mountain and the medicinal herb and said, ‘Son of the wind god, go fetch it.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहा | बताया; कहा | stated; told |
| नाम | नाम | names |
| गिरि | पर्वत का | of the mountain |
| औषधी | औषधि का | of the medicinal herb |
| जाहु | जाओ | go |
| पवनसुत | हे पवनदेव के पुत्र हनुमान | O Hanuman, son of the wind god |
| लेन | लाने के लिए | to fetch it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 55
- स्रोत अभिलेख
- 6.55
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 825
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