लङ्काकाण्ड · दोहा 54 · दोहा/सोरठा
मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।
मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।
जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.54 · पुस्तक पृ. 824, 824
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।
मेघनाद के समान सौ करोड़ योद्धा भी उन्हें उठाने का प्रयास करते रहे।
English explanation
Even a billion warriors like Megh nada kept trying to lift him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेघनाद | मेघनाद के | Megh nada |
| सम | समान | like |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | one hundred |
| जोधा | योद्धा | warriors |
| रहे | प्रयास करते रहे | kept trying |
| उठाइ | उठाने का | to lift him |
2 जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।
जगत के आधार शेष को भला कैसे उठाया जा सकता था? वे खिसियाकर चले गए।
English explanation
How could Shesha, the support of the world, be lifted? They went away in chagrin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगदाधार | जगत के आधार | the support of the world |
| सेष | शेष, यहाँ लक्ष्मण | Shesha, here identifying Lakshmana |
| किमि | कैसे | how |
| उठै | उठाए जा सकते हैं | could be lifted |
| चले | चले गए | went away |
| खिसिआइ | खिसियाकर, लज्जित और झुँझलाकर | in embarrassed frustration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 54
- स्रोत अभिलेख
- 6.54
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 824, 824
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।