लङ्काकाण्ड · दोहा 53 · दोहा/सोरठा
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.53 · पुस्तक पृ. 823, 824
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
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2 जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 53
- स्रोत अभिलेख
- 6.53
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 823, 824
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