लङ्काकाण्ड · दोहा 52 · दोहा/सोरठा
आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.52 · पुस्तक पृ. 822, 823
भावार्थ और शब्दार्थ
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1आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
राम से आज्ञा माँगकर, अंगद आदि वानरों को साथ लिए—
English explanation
Having asked Rama’s permission, with Angada and other monkeys accompanying him—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | permission |
| मागि | माँगकर | having asked for |
| राम | राम | Rama |
| पहिं | से | from |
| अंगदादि | अंगद आदि | Angada and others |
| कपि | वानर | monkeys |
| साथ | साथ में | in company |
2 लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।
लक्ष्मण क्रोधित होकर हाथ में बाण और धनुष लिए चले।
English explanation
Lakshmana set out in anger, holding arrows and a bow in his hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| चले | चल पड़े | set out |
| क्रुद्ध | क्रोधित | angry |
| होइ | होकर | having become |
| बान | बाण | arrows |
| सरासन | धनुष | a bow |
| हाथ | हाथ में | in his hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 52
- स्रोत अभिलेख
- 6.52
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 822, 823
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