लङ्काकाण्ड · दोहा 51 · दोहा/सोरठा
जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।
जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।
ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.51 · पुस्तक पृ. 821, 822
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।
जिनकी प्रबल माया के बल के अधीन शिव, ब्रह्मा और सभी बड़े-छोटे हैं—
English explanation
He under whose powerful maya stand Shiva, Brahma, and all beings, great and small—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनकी; यहाँ श्रीराम की | whose; referring to Rama |
| प्रबल | अत्यंत शक्तिशाली | powerful |
| माया | माया, जगत को प्रभावित करने वाली शक्ति | maya, the power governing appearances |
| बल | बल के अधीन | under the power of |
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| बड़ | बड़े, महान | great |
| छोट | छोटे, साधारण | small, lesser |
2 ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।
उन्हीं को यह खोटी बुद्धि वाला राक्षस अपनी माया दिखा रहा है।
English explanation
To that very one, this demon of misguided understanding displays his own illusions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उन्हीं श्रीराम को | to that very Rama |
| दिखावइ | दिखाता है | shows |
| निसिचर | राक्षस मेघनाद | the demon Meghnad |
| निज | अपनी | his own |
| माया | मायावी छल | illusory tricks |
| मति | बुद्धि | understanding |
| खोट | खोटी, दूषित | misguided, corrupt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 51
- स्रोत अभिलेख
- 6.51
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 821, 822
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