लङ्काकाण्ड · दोहा · दोहा/सोरठा
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।
मूल पाठ
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।
मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ
मूल पाठ के बादसन्ध्या हो गयी जानकर दशग्रीव विलखता हुआ (उदास होकर) महलमें गया। मन्दोदरीने रावणको समझाकर फिर कहा—॥ ३५ (ख)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 807 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।
English explanation
Recognizing that evening had come, ten-headed Ravana went to his palace, lamenting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साँझ | संध्या | evening |
| जानि | जानकर | recognizing |
| दसकंधर | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| भवन | भवन में | to his palace |
| गयउ | गया | went |
| बिलखाइ | विलाप करता हुआ | lamenting |
2 मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।
English explanation
Mandodari again spoke to Ravana, seeking to make him understand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी ने | Mandodari, Ravana’s wife |
| रावनहि | रावण से | to Ravana |
| बहुरि | फिर | again |
| कहा | कहा | said |
| समुझाइ | समझाकर | explaining; counseling |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 807
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।