लङ्काकाण्ड · दोहा 35 (क) · दोहा/सोरठा
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।
पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।
शत्रु के बल को परास्त करके, बल के पुंज वानर अंगद, बालि के पुत्र, हर्षित हुए।
English explanation
Having overcome the enemy’s strength, the mighty monkey warrior Angada, Bali’s son, rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु के | the enemy’s |
| बल | बल को | strength |
| धरषि | परास्त करके | having overcome |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| कपि | वानर अंगद | the monkey warrior Angada |
| बालितनय | बालि के पुत्र | Bali’s son |
| बल | बल के | of strength |
| पुंज | पुंज | an embodiment |
2 पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।
शरीर में रोमांच और आँखों में आँसू लिए अंगद ने राम के कमल जैसे चरण पकड़ लिए।
English explanation
With his body thrilled and tears in his eyes, Angada clasped Rama’s lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलक | रोमांच | thrill; hair standing on end |
| सरीर | शरीर में | in the body |
| नयन | आँखों में | in the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल जैसे | lotus-like |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 35 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।