लङ्काकाण्ड · दोहा 34 (ख) · दोहा/सोरठा
भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।
भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।
कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.34 · पुस्तक पृ. 804, 805
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।
वानर का पैर धरती नहीं छोड़ता; यह देखकर शत्रुओं का घमंड जाता रहा।
English explanation
The monkey's foot does not leave the ground; seeing this, the enemies' pride vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | धरती | the ground |
| न | नहीं | not |
| छाँडत | छोड़ता | leaves |
| कपि | वानर का | the monkey's |
| चरन | पैर | foot |
| देखत | देखकर | seeing |
| रिपु | शत्रुओं का | the enemies' |
| मद | घमंड | pride |
| भाग | भाग गया | vanished |
2 कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।
जैसे करोड़ों विघ्नों के कारण भी संत का मन नीति नहीं छोड़ता।
English explanation
Just as a saint's mind does not abandon righteous conduct even under countless obstacles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of |
| बिघ्न | बाधाओं | obstacles |
| ते | के कारण भी | even because of |
| संत | संत | a saint |
| कर | का | of |
| मन | मन | mind |
| जिमि | जैसे | just as |
| नीति | नीति या सदाचरण | righteous conduct |
| न | नहीं | not |
| त्याग | त्यागता | abandons |
| ख | दोहा 34 का संदर्भ-चिह्न (ख) | reference marker (b) of verse 34 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 34 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.34
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 804, 805
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