लङ्काकाण्ड · दोहा 88 · दोहा
रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार।
रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार।
मैं अकेल कपि भालु बहु माया करौं अपार॥ ८८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.88 · पुस्तक पृ. 860, 861
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार।
रावण ने मन में विचार किया: ‘राक्षसों का संहार हो गया है।’
English explanation
Ravana reflected in his heart: ‘The demons have been slaughtered.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | रावण, राक्षसों का राजा | Ravana, king of the demons |
| हृदयँ | हृदय में; मन में | in his heart; inwardly |
| बिचारा | विचार किया | reflected |
| भा | हुआ; हो गया | has occurred |
| निसिचर | राक्षसों का | of the demons |
| संघार | संहार; विनाश | slaughter; destruction |
2मैं अकेल कपि भालु बहु माया करौं अपार॥ ८८॥
‘मैं अकेला हूँ, और वानर तथा भालू बहुत हैं; मैं अपार माया रचूँ।’
English explanation
‘I am alone, while the monkeys and bears are many; let me conjure vast illusions.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं, रावण | I, Ravana |
| अकेल | अकेला | alone |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| बहु | बहुत; बड़ी संख्या में | many; numerous |
| माया | मायावी भ्रम | magical illusions |
| करौं | मैं करूँ; रचूँ | let me create |
| अपार | अपार; असीम | vast; boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 88
- स्रोत अभिलेख
- 6.88
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 860, 861
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