लङ्काकाण्ड · दोहा 87 · दोहा
बीर परहिं जनु तीर तरु मज्जा बहु बह फेन।
बीर परहिं जनु तीर तरु मज्जा बहु बह फेन।
कादर देखि डरहिं तहँ सुभटन्ह के मन चेन॥ ८७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.87 · पुस्तक पृ. 859, 859
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बीर परहिं जनु तीर तरु मज्जा बहु बह फेन।
वीर ऐसे गिरते हैं मानो नदी के तट के वृक्ष हों; बहुत-सी मज्जा झाग के रूप में बहती है।
English explanation
Warriors fall like trees on a riverbank; abundant marrow flows as foam.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीर | वीर योद्धा | warriors |
| परहिं | गिरते हैं | fall |
| जनु | मानो | as though |
| तीर | नदी के तट के | on the riverbank |
| तरु | वृक्ष | trees |
| मज्जा | अस्थियों की मज्जा | bone marrow |
| बहु | बहुत-सी | abundant |
| बह | बहती है | flows |
| फेन | झाग | foam |
2कादर देखि डरहिं तहँ सुभटन्ह के मन चेन॥ ८७॥
यह देखकर कायर डरते हैं, जबकि वहाँ शूरवीरों के मन में चैन है।
English explanation
The fainthearted are frightened at the sight, while the brave warriors remain at ease there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कादर | कायर लोग | the fainthearted |
| देखि | देखकर | on seeing this |
| डरहिं | डरते हैं | are frightened |
| तहँ | वहाँ | there |
| सुभटन्ह | शूरवीरों | brave warriors |
| के | के | of |
| मन | मन में | in the minds |
| चेन | चैन; निश्चिंतता | ease; composure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 87
- स्रोत अभिलेख
- 6.87
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 859, 859
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