लङ्काकाण्ड · दोहा 89 · दोहा
बहुरि राम सब तन चितइ बोले बचन गँभीर।
बहुरि राम सब तन चितइ बोले बचन गँभीर।
द्वंदजुद्ध देखहु सकल श्रमित भए अति बीर॥ ८९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.89 · पुस्तक पृ. 861, 862
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहुरि राम सब तन चितइ बोले बचन गँभीर।
फिर राम ने सबकी ओर देखकर गंभीर वचन कहे।
English explanation
Then Rama looked toward everyone and spoke solemn words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then; again |
| राम | श्रीराम | Rama |
| सब | सबकी | everyone’s |
| तन | ओर | toward |
| चितइ | देखकर | having looked |
| बोले | कहे | spoke |
| बचन | वचन | words |
| गँभीर | गंभीर | solemn |
2द्वंदजुद्ध देखहु सकल श्रमित भए अति बीर॥ ८९॥
राम ने कहा: तुम सब द्वंद्वयुद्ध देखो; वीर बहुत थक गए हैं।
English explanation
Rama said: All of you watch the single combat; the warriors have become very weary.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वंदजुद्ध | दो योद्धाओं का आमने-सामने युद्ध | single combat between two warriors |
| देखहु | देखो | watch |
| सकल | तुम सब | all of you |
| श्रमित | थके हुए | weary |
| भए | हो गए हैं | have become |
| अति | बहुत | very |
| बीर | वीर योद्धा | valiant warriors |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 89
- स्रोत अभिलेख
- 6.89
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 861, 862
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