लङ्काकाण्ड · दोहा 90 · दोहा
राम बचन सुनि बिहँसा मोहि सिखावत ग्यान।
राम बचन सुनि बिहँसा मोहि सिखावत ग्यान।
बयरु करत नहिं तब डरे अब लागे प्रिय प्रान॥ ९०॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.9 · पुस्तक पृ. 862, 863
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम बचन सुनि बिहँसा मोहि सिखावत ग्यान।
राम के वचन सुनकर रावण हँसा और बोला, ‘मुझे ज्ञान सिखा रहे हो!’
English explanation
Hearing Rama’s words, Ravana laughed: ‘You are teaching me wisdom!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| बचन | वचन; बातें | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिहँसा | हँसा | laughed |
| मोहि | मुझे | me |
| सिखावत | सिखा रहे हो | you are teaching |
| ग्यान | ज्ञान; समझ की बातें | wisdom; understanding |
2बयरु करत नहिं तब डरे अब लागे प्रिय प्रान॥ ९०॥
‘जब वैर कर रहे थे, तब नहीं डरे; अब प्राण प्यारे लगने लगे हैं!’
English explanation
‘You were not afraid when you were making an enemy of me; now your life has become dear to you!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बयरु | वैर; शत्रुता | enmity |
| करत | करते समय; कर रहे थे | while making; were engaging in |
| नहिं | नहीं | not |
| तब | उस समय | then |
| डरे | डरे | were afraid |
| अब | अब | now |
| लागे | लगने लगे हैं | have begun to seem |
| प्रिय | प्यारे | dear |
| प्रान | प्राण; अपना जीवन | your life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 90
- स्रोत अभिलेख
- 6.9
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 862, 863
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।