लङ्काकाण्ड · दोहा 91 · दोहा
तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल।
तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल।
राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल॥ ९१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.91 · पुस्तक पृ. 864, 864
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल।
राम ने धनुष कान तक खींचा और भयानक बाण छोड़े।
English explanation
Rama drew the bow back to his ear and released fearsome arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तानेउ | खींचा | drew back |
| चाप | धनुष | the bow |
| श्रवन | कान | the ear |
| लगि | तक | as far as |
| छाँड़े | छोड़े | released |
| बिसिख | बाण | arrows |
| कराल | भयानक | fearsome |
2राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल॥ ९१॥
राम के बाणों के समूह लहराते हुए चले, मानो साँप हों।
English explanation
Rama's volleys of arrows sped onward, undulating as though they were serpents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama's |
| मारगन | बाणों के | of arrows |
| गन | समूह | volleys |
| चले | चल पड़े | sped onward |
| लहलहात | लहराते हुए | undulating |
| जनु | मानो | as though |
| ब्याल | साँप | serpents |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 91
- स्रोत अभिलेख
- 6.91
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 864, 864
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।