लङ्काकाण्ड · दोहा 63 · दोहा/सोरठा
राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।
राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।
रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.63 · पुस्तक पृ. 832, 833
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।
राम के रूप और गुणों का स्मरण करते हुए कुंभकर्ण एक क्षण के लिए मग्न हो गया।
English explanation
Remembering Rama's form and virtues, Kumbhakarna became absorbed for a moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | Rama's |
| रूप | रूप | form |
| गुन | गुण | virtues |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| मगन | तल्लीन | absorbed |
| भयउ | हो गया | became |
| छन | क्षण | moment |
| एक | एक | one |
2 रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।
रावण ने करोड़ घड़े मदिरा और अनेक भैंसे मँगवाए।
English explanation
Ravana ordered ten million jars of liquor and many buffaloes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | राक्षसराज रावण ने | Ravana, the demon king |
| मागेउ | मँगवाए | ordered to be brought |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| घट | घड़े | jars |
| मद | मदिरा के | of liquor |
| अरु | और | and |
| महिष | भैंसे | buffaloes |
| अनेक | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 63
- स्रोत अभिलेख
- 6.63
- सहायक विषय
- रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 832, 833
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