लङ्काकाण्ड · दोहा 62 · दोहा/सोरठा
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।
जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.62 · पुस्तक पृ. 831, 832
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।
तब रावण के वचन सुनकर कुंभकर्ण दुःखी होकर विलाप करने लगा।
English explanation
Hearing Ravana’s words, Kumbhakarna then lamented in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| दसकंधर | दस सिरों वाले रावण के | of ten-headed Ravana |
| बचन | वचन; बातें | words |
| तब | तब | then |
| कुंभकरन | कुंभकर्ण | Kumbhakarna |
| बिलखान | विलाप करने लगा; दुःखी हुआ | lamented; became distressed |
2 जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।
‘विश्व की माता सीता का हरण करके ले आए, और अब, मूर्ख, अपना कल्याण चाहते हो!’
English explanation
‘Having abducted and brought away Sita, the Mother of the world, you now seek your own well-being, fool!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगदंबा | जगत की माता सीता को | Sita, Mother of the world |
| हरि | हरण करके | abducting |
| आनि | ले आकर | having brought away |
| अब | अब | now |
| सठ | हे मूर्ख | you fool |
| चाहत | चाहते हो | you seek |
| कल्यान | अपना कल्याण; कुशल | your own well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 62
- स्रोत अभिलेख
- 6.62
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 831, 832
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।