लङ्काकाण्ड · दोहा 6 · दोहा/सोरठा
रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।
रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।
सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।
जानकी को राम को सौंपकर, उनके कमल-समान चरणों में सिर झुकाइए।
English explanation
Return Janaki to Rama and bow your head at his lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| सौपि | सौंपकर | having entrusted |
| जानकी | सीता, जनक की पुत्री | Sita, daughter of Janaka |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| पद | चरणों में | at his feet |
| माथ | सिर | your head |
2 सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।
पुत्र को राज्य सौंपकर वन में जाइए और रघुनाथ राम का भजन कीजिए।
English explanation
Entrust the kingdom to your son, go to the forest, and worship Rama, lord of Raghu’s line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | your son |
| कहुँ | को | to |
| राज | राज्य | the kingdom |
| समर्पि | सौंपकर | having entrusted |
| बन | वन में | to the forest |
| जाइ | जाकर | having gone |
| भजिअ | भजन कीजिए | worship |
| रघुनाथ | रघुवंश के स्वामी राम का | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
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