लङ्काकाण्ड · दोहा 7 · दोहा/सोरठा
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।
नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 778, 779
भावार्थ और शब्दार्थ
1अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।
ऐसा कहकर मंदोदरी ने आँखों में आँसू भरकर पति के चरण पकड़ लिए; उनका शरीर काँप रहा था।
English explanation
Having said this, Mandodari clasped her husband’s feet with tears filling her eyes and her body trembling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| नयन | आँखों में | in her eyes |
| नीर | आँसू | tears |
| भरि | भरकर | filling |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| पद | पति के चरण | her husband’s feet |
| कंपित | काँपता हुआ | trembling |
| गात | शरीर | body |
2 नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।
हे नाथ, रघुनाथ राम का भजन कीजिए, जिससे मेरा सौभाग्य—आपके जीवित रहने का सुख—अटल रहे।
English explanation
My lord, worship Rama, lord of Raghu’s line, so that my married good fortune—the blessing of your remaining alive—may endure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| भजहु | भजन कीजिए | worship |
| रघुनाथहि | रघुकुल के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s line |
| अचल | अटल | lasting |
| होइ | हो जाए | may become |
| अहिवात | पति के जीवित रहने का सौभाग्य | the good fortune of having a living husband |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 778, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।