लङ्काकाण्ड · दोहा 8 · दोहा/सोरठा
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।
निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 779, 779
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।
सबकी बातें कानों से सुनकर प्रहस्त हाथ जोड़कर बोला।
English explanation
Having heard everyone’s words, Prahasta spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| श्रवन | कानों से | with his ears |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कह | बोला | said |
| प्रहस्त | प्रहस्त, रावण का सेनापति | Prahasta, Ravana’s commander |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
2 निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।
हे प्रभु, नीति के विरुद्ध काम न कीजिए; इन मंत्रियों की बुद्धि बहुत थोड़ी है।
English explanation
My lord, do not act against sound policy; these ministers have very little discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निति | नीति के | sound policy |
| बिरोध | विरुद्ध | against |
| न | न | not |
| करिअ | कीजिए | act |
| प्रभु | हे प्रभु | O lord |
| मत्रिंन्ह | मंत्रियों की | of the ministers |
| मति | बुद्धि | discernment |
| अति | बहुत | very |
| थोरि | थोड़ी है | is scant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 8
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 779, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।