लङ्काकाण्ड · दोहा 9 · दोहा/सोरठा
नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।
नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।
नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.9 · पुस्तक पृ. 780, 780
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।
यदि वे अपनी पत्नी को पाकर लौट जाएँ, तो झगड़ा न बढ़ाया जाए।
English explanation
If he and his companions return after he regains his wife, then do not prolong the conflict.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | पत्नी, सीता | his wife, Sita |
| पाइ | पाकर | having regained |
| फिरि | वापस | back |
| जाहिं | चले जाएँ | depart |
| जौं | यदि | if |
| तौ | तो | then |
| न | नहीं | not |
| बढ़ाइअ | बढ़ाया जाए | should be prolonged |
| रारि | झगड़ा; संघर्ष | quarrel; conflict |
2 नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।
नहीं तो, हे तात, युद्ध में आमने-सामने डटकर प्रहार किया जाए।
English explanation
Otherwise, dear one, confront them in battle and strike with determination.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहिं | यदि नहीं; अन्यथा | if not; otherwise |
| त | तो | then |
| सन्मुख | आमने-सामने | face to face |
| समर | युद्ध | battle |
| महि | में | in |
| तात | हे तात; प्रियजन | dear one |
| करिअ | किया जाए | let it be done |
| हठि | दृढ़ होकर; डटकर | with determination |
| मारि | प्रहार; मार | striking; attack |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 9
- स्रोत अभिलेख
- 6.9
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 780, 780
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