लङ्काकाण्ड · दोहा 10 · दोहा/सोरठा
सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 781, 781
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
वह रावण सौ इंद्रों के समान निरंतर विलास करता रहता है।
English explanation
Ravana continually indulges in pleasures like a hundred Indras.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनासीर | इंद्र, देवताओं के राजा | Indra, king of the gods |
| सत | सौ | a hundred |
| सरिस | के समान | like |
| सो | वह रावण | he, Ravana |
| संतत | निरंतर | continually |
| करइ | करता है | engages in |
| बिलास | विलास | luxurious pleasures |
2 परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
अत्यंत शक्तिशाली शत्रु सिर पर आ पहुँचा है, फिर भी उसे न चिंता है, न भय।
English explanation
An immensely powerful enemy looms over him, yet he feels neither concern nor fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | immensely |
| प्रबल | शक्तिशाली | powerful |
| रिपु | शत्रु | enemy |
| सीस | सिर | head |
| पर | पर | over |
| तद्यपि | फिर भी | yet |
| सोच | चिंता | concern |
| न | नहीं | neither |
| त्रास | भय | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 10
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 781, 781
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