लङ्काकाण्ड · दोहा 11 (क) · दोहा/सोरठा
एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।
एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।
धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 782, 782
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।
इस प्रकार कृपा के मूर्त रूप और गुणों के धाम राम बैठे हुए थे।
English explanation
Thus Rama, the embodiment of compassion and the abode of virtues, was seated.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| कृपा | करुणा के | of compassion |
| रूप | मूर्त रूप | embodiment |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| धाम | निवास; भंडार | abode; repository |
| रामु | राम | Rama |
| आसीन | बैठे हुए | seated |
2 धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।
धन्य हैं वे लोग जो राम के इस स्वरूप के ध्यान में सदा पूरी तरह तल्लीन रहते हैं।
English explanation
Blessed are those who remain ever wholly absorbed in meditation on this form of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य; सौभाग्यशाली | blessed; fortunate |
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| एहिं | इस स्वरूप के | on this form |
| ध्यान | ध्यान में | in meditation |
| जे | जो | who |
| रहत | रहते हैं | remain |
| सदा | सदैव | always |
| लयलीन | पूर्णतः तल्लीन | wholly absorbed |
| क | पद्य-संदर्भ का ‘क’ चिह्न | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 782
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