लङ्काकाण्ड · दोहा 11 (ख) · दोहा/सोरठा
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।
कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 782, 782
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।
पूर्व दिशा की ओर देखकर प्रभु राम ने उगते हुए चंद्रमा को देखा।
English explanation
Looking toward the east, Lord Rama saw the rising moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरब | पूर्व | eastern |
| दिसा | दिशा | direction |
| बिलोकि | देखकर | having looked toward |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| देखा | देखा | saw |
| उदित | उगा हुआ; उदय होता | risen; rising |
| मंयक | चंद्रमा | moon |
2 कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।
राम सब से कहते हैं, ‘देखो, चंद्रमा सिंह के समान निर्भय है।’
English explanation
Rama says to everyone, ‘Look at the moon, fearless like a lion.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हैं | says |
| सबहि | सबसे; सबको | to everyone |
| देखहु | देखो | look at |
| ससिहि | चंद्रमा को | the moon |
| मृगपति | पशुओं का राजा, सिंह | lion, king of beasts |
| सरिस | के समान | like |
| असंक | निर्भय; निःशंक | fearless; unhesitating |
| ख | पद्य-संदर्भ का ‘ख’ चिह्न | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 782
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