लङ्काकाण्ड · दोहा 12 (क) · दोहा/सोरठा
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।
तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 782, 783
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।
हनुमान कहते हैं: सुनिए प्रभु, चंद्रमा आपका प्रिय सेवक है।
English explanation
Hanuman says: Listen, Lord, the moon is your beloved servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| हनुमंत | रामभक्त हनुमान | Hanuman, Rama's devotee |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| तुम्हारा | आपका | your |
| प्रिय | प्रिय | beloved |
| दास | सेवक | servant |
2 तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।
आपकी मूर्ति चंद्रमा के हृदय में बसती है; वही कालिमा के रूप में दिखाई देती है।
English explanation
Your form dwells in the moon's heart; that is what appears as its darkness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| मूरति | मूर्ति अथवा रूप | form or image |
| बिधु | चंद्रमा के | of the moon |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बसति | बसती है | dwells |
| सोइ | वही | that very form |
| स्यामता | श्याम रंग | dark coloration |
| अभास | दिखाई पड़ना | appearance |
| क | दोहा १२ का संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (क) for verse 12 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 12 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 783
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।