लङ्काकाण्ड · दोहा 12 (ख) · दोहा/सोरठा
पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।
पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।
दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 782, 783
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।
पवनपुत्र हनुमान के वचन सुनकर सुजान राम मुस्कराए।
English explanation
Hearing the words of Hanuman, the wind-god's son, wise Rama smiled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पवन | पवनदेव | the wind-god |
| तनय | पुत्र हनुमान | son, Hanuman |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिहँसे | मुस्कराए | smiled |
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| सुजान | सुजान, विवेकी | wise and discerning |
2 दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।
दक्षिण दिशा की ओर देखकर कृपा के भंडार प्रभु बोले।
English explanation
Looking toward the south, the Lord, the treasury of compassion, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छिन | दक्षिण | southern |
| दिसि | दिशा की ओर | toward the direction |
| अवलोकि | देखकर | having looked |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बोले | बोले | spoke |
| कृपा | करुणा का | of compassion |
| निधान | भंडार | treasury |
| ख | दोहा १२ का संदर्भ-चिह्न (ख) | reference marker (ख) for verse 12 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 12 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 783
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