लङ्काकाण्ड · दोहा 13 (क) · दोहा/सोरठा
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।
सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.13 · पुस्तक पृ. 784, 784
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।
तब एक ही बाण से छत्र, मुकुट और कुंडल काट गिराए गए।
English explanation
Then a single arrow struck down the parasol, crown, and earrings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छत्र | राजछत्र | royal parasol |
| मुकुट | रावण का मुकुट | Ravana’s crown |
| ताटंक | मंदोदरी के कुंडल | Mandodari’s earrings |
| तब | तब | then |
| हते | प्रहार करके गिराए गए | were struck down |
| एकहीं | एक ही से | with just one |
| बान | बाण | arrow |
2 सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
सबके देखते-देखते वे धरती पर गिर पड़े, पर कोई इसका रहस्य नहीं जान सका।
English explanation
They fell to the ground before everyone’s eyes, but no one understood the mystery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबकें | सबके | everyone’s |
| देखत | देखते हुए | while watching |
| महि | धरती पर | to the ground |
| परे | गिर पड़े | fell |
| मरमु | रहस्य, वास्तविक कारण | mystery, true cause |
| न | नहीं | not |
| कोऊ | कोई भी | anyone |
| जान | जान सका | could understand |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.13
- सहायक विषय
- श्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
- मुद्रित पृष्ठ
- 784, 784
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।