लङ्काकाण्ड · दोहा 13 (ख) · दोहा/सोरठा
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।
रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.13 · पुस्तक पृ. 784, 784
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।
ऐसा कौतुक करके राम का बाण लौट आया और तरकश में प्रवेश कर गया।
English explanation
Having performed this marvel, Rama’s arrow returned and entered the quiver.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| कौतुक | अद्भुत कौतुक | a marvel |
| करि | करके | having performed |
| राम | राम का | Rama’s |
| सर | बाण | arrow |
| प्रबिसेउ | प्रवेश कर गया | entered |
| आइ | आकर, लौटकर | having returned |
| निषंग | तरकश में | into the quiver |
2 रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।
आनंद में इस बड़े विघ्न को देखकर रावण की सभा के सभी लोग आशंकित हो गए।
English explanation
Seeing this great disruption of their enjoyment, everyone in Ravana’s assembly became apprehensive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | रावण की | Ravana’s |
| सभा | सभा | assembly |
| ससंक | आशंकित, भयभीत | apprehensive, alarmed |
| सब | सभी लोग | everyone |
| देखि | देखकर | having seen |
| महा | बड़ा, भारी | great |
| रसभंग | आनंद में विघ्न | disruption of enjoyment |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.13
- सहायक विषय
- श्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
- मुद्रित पृष्ठ
- 784, 784
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