लङ्काकाण्ड · दोहा 14 · दोहा/सोरठा
बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।
बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।
लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.14 · पुस्तक पृ. 785, 785
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।
रघुवंश के मणि राम विश्वरूप हैं; मेरी बात पर विश्वास कीजिए।
English explanation
Rama, the jewel of Raghu's lineage, has the universe as his form; believe my words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वरुप | समस्त विश्व जिनका रूप है | having the universe as his form |
| रघुबंस | रघु का वंश | Raghu's lineage |
| मनि | मणि; श्रेष्ठ रत्न राम | jewel: Rama, its finest scion |
| करहु | कीजिए | place; do |
| बचन | कथन पर; मेरी बात पर | in my words |
| बिस्वासु | विश्वास | trust |
2 लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।
वेद जिनके प्रत्येक अंग में विभिन्न लोकों की कल्पना करते हैं।
English explanation
The Vedas envision the various worlds in each of his limbs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | लोकों की; विभिन्न जगतों की | of the worlds; cosmic realms |
| कल्पना | कल्पना; रूपात्मक निरूपण | conception; symbolic representation |
| बेद | वेद | the Vedas |
| कर | करते हैं | make; envision |
| अंग | अंग | limb |
| अंग | अंग; प्रत्येक अंग | limb; every limb |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| जासु | जिनके; राम के | of whom; Rama's |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 14
- स्रोत अभिलेख
- 6.14
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 785
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।