लङ्काकाण्ड · दोहा 15 (क) · दोहा/सोरठा
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.15 · पुस्तक पृ. 785, 786
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
शिव उनका अहंकार, ब्रह्मा उनकी बुद्धि, चंद्रमा उनका मन और महत्तत्त्व उनका चित्त है।
English explanation
Shiva is his ego-sense, Brahma his intellect, the moon his mind, and the cosmic principle of mahat his consciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहंकार | अहंभाव | ego-sense |
| सिव | शिव | Shiva |
| बुद्धि | बुद्धि; विवेक की शक्ति | intellect; faculty of discernment |
| अज | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| मन | मन | mind |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| चित्त | चित्त; चेतना का अंतःक्षेत्र | consciousness; inner mental field |
| महान | महत्तत्त्व; समष्टि बुद्धि का तत्त्व | mahat, the cosmic principle of intelligence |
2मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।
भगवान राम मनुष्य का वेश धारण किए हैं; उनका स्वरूप समस्त चर-अचर जगत है।
English explanation
Lord Rama wears a human guise; his form is the entire world of moving and unmoving beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनुज | मनुष्य का | human |
| बास | वेश; आवरण | guise; garb |
| सचराचर | समस्त चर और अचर जगत | all moving and unmoving existence |
| रुप | स्वरूप | form |
| राम | राम; रघुवंश के प्रभु | Rama, Lord of the Raghu lineage |
| भगवान | भगवान | the divine Lord |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (a) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 15 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.15
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 786
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