लङ्काकाण्ड · दोहा 42 · दोहा/सोरठा
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।
ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.42 · पुस्तक पृ. 813, 814
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।
अनेक हथियार धारण किए सभी योद्धा बार-बार ललकारकर भिड़ते हैं।
English explanation
Bearing many weapons, all the warriors clash, repeatedly challenging their opponents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| आयुध | हथियार | weapons |
| धर | धारण किए हुए | bearing |
| सुभट | योद्धा | warriors |
| सब | सब | all |
| भिरहिं | भिड़ते हैं | clash |
| पचारि | ललकारकर | challenging |
| पचारि | बार-बार ललकारकर | challenging again |
2 ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।
परिघों और त्रिशूलों से प्रहार करके उन्होंने भालुओं और वानरों को व्याकुल कर दिया।
English explanation
Striking with iron bludgeons and tridents, they threw the bears and monkeys into distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| किए | कर दिया | made |
| भालु | भालुओं को | the bears |
| कपि | वानरों को | the monkeys |
| परिघ | लोहे के भारी डंडों से | with iron bludgeons |
| त्रिसूलन्हि | त्रिशूलों से | with tridents |
| मारी | प्रहार करके | by striking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 42
- स्रोत अभिलेख
- 6.42
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 813, 814
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