लङ्काकाण्ड · दोहा 41 · दोहा
एकु एकु निसिचर गहि पुनि कपि चले पराइ।
एकु एकु निसिचर गहि पुनि कपि चले पराइ।
ऊपर आपु हेठ भट गिरहिं धरनि पर आइ॥ ४१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.41 · पुस्तक पृ. 812, 812
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एकु एकु निसिचर गहि पुनि कपि चले पराइ।
फिर वानर एक-एक राक्षस को पकड़कर भाग चले।
English explanation
Then the monkeys each seized a demon and rushed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकु | एक | one |
| एकु | एक | each |
| निसिचर | राक्षस को | a demon |
| गहि | पकड़कर | seizing |
| पुनि | फिर | then; again |
| कपि | वानर | the monkeys |
| चले | चल पड़े | set off |
| पराइ | भागकर | running away |
2ऊपर आपु हेठ भट गिरहिं धरनि पर आइ॥ ४१॥
वे धरती पर आ गिरते हैं—वानर स्वयं ऊपर रहते हैं और राक्षस योद्धा नीचे।
English explanation
They land on the ground with the monkeys themselves above and the demon warriors beneath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊपर | ऊपर | above; on top |
| आपु | स्वयं वानर | the monkeys themselves |
| हेठ | नीचे | beneath |
| भट | राक्षस योद्धा | the demon warriors |
| गिरहिं | गिरते हैं | fall; land |
| धरनि | धरती | the ground |
| पर | पर | on |
| आइ | आकर | coming down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 41
- स्रोत अभिलेख
- 6.41
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 812, 812
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