लङ्काकाण्ड · दोहा 40 · दोहा/सोरठा
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।
कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 811, 812
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।
नाना अस्त्र, बाण और धनुष धारण किए हुए बलवान, वीर राक्षस—
English explanation
The strong, valiant demons, bearing various weapons, arrows, and bows—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नानायुध | नाना प्रकार के अस्त्र | various weapons |
| सर | बाण | arrows |
| चाप | धनुष | bows |
| धर | धारण किए हुए | bearing |
| जातुधान | राक्षस | demons |
| बल | बलवान | strong |
| बीर | वीर | valiant |
2 कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।
करोड़ों-करोड़ रणधीर योद्धा किले के कँगूरों पर चढ़ गए।
English explanation
Crores upon crores of battle-stalwart warriors climbed onto the fort’s battlements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोट | किले के | of the fort |
| कँगूरन्हि | कँगूरों पर | onto the battlements |
| चढ़ि | चढ़कर | climbing |
| गए | गए | went up |
| कोटि | करोड़ों | crores |
| कोटि | करोड़ों और | upon crores |
| रनधीर | युद्ध में धीर वीर | warriors steadfast in battle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 40
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 811, 812
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