लङ्काकाण्ड · दोहा 39 · दोहा/सोरठा
जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।
जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।
गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.39 · पुस्तक पृ. 810, 811
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।
राम की जय! लक्ष्मण की जय! वानरराज सुग्रीव की जय!
English explanation
Victory to Rama! Victory to Lakshmana! Victory to Sugriva, king of the monkeys!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जयति | जय हो | victory to |
| राम | राम | Rama |
| जय | जय हो | victory to |
| लछिमन | राम के भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जय | जय हो | victory to |
| कपीस | वानरों के राजा | king of the monkeys |
| सुग्रीव | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, the monkey king |
2 गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।
महान बल की पराकाष्ठा स्वरूप वानर और भालू सिंह-जैसी गर्जना करते हैं।
English explanation
The monkeys and bears, the very pinnacle of immense strength, roar like lions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गर्जहिं | गर्जते हैं | roar |
| सिंघनाद | सिंह-जैसी गर्जना | lion-like roars |
| कपि | वानर योद्धा | monkey warriors |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| महा | महान; अपार | immense |
| बल | शक्ति | strength |
| सींव | सीमा; पराकाष्ठा | the utmost limit; pinnacle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39
- स्रोत अभिलेख
- 6.39
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 810, 811
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।