लङ्काकाण्ड · दोहा 16 (ख) · दोहा/सोरठा
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.16 · पुस्तक पृ. 786, 787
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
यद्यपि बादल अमृत बरसाएँ, फिर भी बेंत न फूलता है, न फलता है।
English explanation
Even if clouds rain nectar, the cane neither flowers nor bears fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलह | फूलता है | flowers |
| फरइ | फलता है | bears fruit |
| न | नहीं | not |
| बेत | बेंत का पौधा | the cane plant |
| जदपि | यद्यपि | even if |
| सुधा | अमृत | nectar |
| बरषहिं | बरसाते हैं | rain down |
| जलद | बादल | clouds |
2 मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।
मूर्ख के हृदय में समझ नहीं आती, भले ही उसे ब्रह्मा के समान गुरु मिल जाएँ।
English explanation
Understanding does not awaken in a fool’s heart, even if he finds a teacher equal to Brahma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मूरुख | मूर्ख के | a fool’s |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| न | नहीं | not |
| चेत | समझ जागती | understanding awakens |
| जौं | भले ही | even if |
| गुर | गुरु | a teacher |
| मिलहिं | मिल जाएँ | is found |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के | Brahma, the creator |
| सम | समान | equal to |
| ख | पद्य-संदर्भ का खंड-चिह्न | verse-reference section marker |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 16 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.16
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 786, 787
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।