लङ्काकाण्ड · दोहा 17 (क) · दोहा/सोरठा
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.17 · पुस्तक पृ. 787, 788
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
प्रभु की आज्ञा सिर पर धारण करके और उनके चरणों को प्रणाम करके अंगद उठे।
English explanation
Reverently accepting the Lord’s command upon his head and bowing at his feet, Angada rose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम की | of Lord Rama |
| अग्या | आज्ञा | command |
| धरि | धारण करके | having placed |
| सीस | सिर पर | upon his head |
| चरन | चरणों को | the feet |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| उठेउ | उठे | rose |
2 सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।
हे प्रभु राम, जिस पर आप कृपा करते हैं, वही गुणों का सागर होता है।
English explanation
O Lord Rama, whoever receives your grace is indeed an ocean of virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very person |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| सागर | सागर | ocean |
| ईस | हे प्रभु | O Lord |
| राम | हे राम | O Rama |
| कृपा | कृपा | grace |
| जा | जिस | whom |
| पर | पर | upon |
| करहु | आप करते हैं | you bestow |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 17 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.17
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 787, 788
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।