लङ्काकाण्ड · दोहा 16 (क) · दोहा/सोरठा
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.16 · पुस्तक पृ. 786, 787
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
दस सिरों वाला रावण इस प्रकार बहुत विनोद करता रहा; इसी बीच प्रभात हो गया।
English explanation
As ten-headed Ravana continued jesting in this way, dawn appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| करत | करते हुए | while engaging in |
| बिनोद | हँसी-विनोद | jesting |
| बहु | बहुत | much |
| प्रात | प्रभात | dawn |
| प्रगट | प्रकट हुआ | appeared |
| दसकंध | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
2 सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
स्वभाव से निःशंक और अहंकार में अंधा लंकापति रावण सभा में गया।
English explanation
Naturally unafraid and blinded by arrogance, Ravana, lord of Lanka, went to the assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| असंक | निःशंक | unafraid |
| लंकपति | लंका का स्वामी रावण | Ravana, lord of Lanka |
| सभाँ | सभा में | to the assembly |
| गयउ | गया | went |
| मद | अहंकार से | by arrogance |
| अंध | अंधा | blinded |
| क | पद्य-संदर्भ का खंड-चिह्न | verse-reference section marker |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 16 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.16
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 786, 787
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