लङ्काकाण्ड · दोहा 100 · दोहा
देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह बिचार।
देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह बिचार।
अंतरहित होइ निमिष महुँ कृत माया बिस्तार॥ १००॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 875, 876
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह बिचार।
एआई-प्रारूप अर्थ: बड़े और प्रबल वानरों को देखकर रावण ने विचार किया।
English explanation
AI-draft meaning: Seeing the great, powerful monkeys, Ravana considered what to do.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| महा | बड़े; महान | great; mighty |
| मर्कट | वानरों को | the monkeys |
| प्रबल | अत्यंत बलवान | very powerful |
| रावन | राक्षसराज रावण ने | Ravana, the demon king |
| कीन्ह | किया | made; undertook |
| बिचार | विचार | consideration; deliberation |
2अंतरहित होइ निमिष महुँ कृत माया बिस्तार॥ १००॥
एआई-प्रारूप अर्थ: एक पल में अदृश्य होकर उसने माया का विस्तार किया।
English explanation
AI-draft meaning: Becoming invisible in an instant, he spread his illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतरहित | अदृश्य | invisible; vanished from sight |
| होइ | होकर | having become |
| निमिष | एक पल | an instant; a blink |
| महुँ | में | in; within |
| कृत | किया | made; effected |
| माया | मायावी भ्रम का | of magical illusion |
| बिस्तार | विस्तार; फैलाव | expansion; spreading |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 100
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 875, 876
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।