लङ्काकाण्ड · दोहा 99 · दोहा
काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान।
काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान।
तब रावनहि हृदय महँु मरिहहिं रामु सुजान॥ ९९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान।
सिर कटते समय रावण व्याकुल होगा और उसका तुम्हारे प्रति ध्यान छूट जाएगा।
English explanation
As his heads are cut off, Ravana will become distraught and cease thinking of you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटत | काटे जाते समय | while being cut off |
| सिर | सिर | heads |
| होइहि | हो जाएगा | will become |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| छुटि | छूट | cease |
| जाइहि | जाएगा | will |
| तव | तुम्हारा (सीता का) | of you (Sita) |
| ध्यान | ध्यान | thought |
2तब रावनहि हृदय महँु मरिहहिं रामु सुजान॥ ९९॥
तब सुजान राम रावण के हृदय में बाण मारेंगे।
English explanation
Then wise Rama will strike Ravana in the heart with an arrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रावनहि | रावण को | Ravana |
| हृदय | हृदय | heart |
| महँु | में | in |
| मरिहहिं | प्रहार करेंगे | will strike |
| रामु | राम | Rama |
| सुजान | सुजान, विवेकशील | wise and discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 99
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।